कल का मौसम: चक्रवात अर्णब से आंध्र तट पर तबाही, केरल में बारिश घटने के आसार
चक्रवात अर्णब के आंध्र प्रदेश तट से टकराने के बाद कई जिलों में नुकसान की खबर है। केरल में बारिश कम होने और तापमान बढ़ने के आसार हैं।
"कल का मौसम" इन दिनों देश में सबसे ज़्यादा खोजा जा रहा सवाल है, और इसकी वजह बंगाल की खाड़ी में बना चक्रवाती तूफ़ान अर्णब है। चक्रवात ने आंध्र प्रदेश के तट से टकराकर भारी नुकसान किया है। ताज़ा रिपोर्टों के मुताबिक़ इसमें अब तक 8 लोगों की मौत की खबर है, हालांकि यह आंकड़ा अभी आधिकारिक रूप से पुष्ट नहीं हुआ है।
आंध्र तट पर नुकसान
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, चक्रवात अर्णब ने आंध्र तट पर पेड़ और बिजली के खंभे उखाड़ दिए और घरों को नुकसान पहुंचाया। तेज़ हवाओं और बारिश से कई इलाकों में आम जनजीवन प्रभावित हुआ है।
रिपोर्टों में बताया गया है कि यह तूफ़ान बुधवार को लैंडफॉल कर गया। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार यह बहुत गंभीर चक्रवाती तूफ़ान था, जो आगे कमज़ोर होकर डीप डिप्रेशन में बदलने का अनुमान है।
केरल में बारिश घटेगी, तापमान चढ़ेगा
द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक़ केरल में अगले कुछ दिनों तक बारिश की गतिविधि काफ़ी कम होने की संभावना है। बारिश थमने के साथ दिन का तापमान बढ़ने लगा है, और राज्य के कई स्थानों पर सामान्य से 3 से 4 डिग्री सेल्सियस ज़्यादा तापमान दर्ज किया गया है।
अगले एक हफ्ते के विस्तारित पूर्वानुमान में केरल पर किसी बड़ी बारिश का संकेत नहीं है। आईएमडी के अनुसार पूर्वोत्तर मानसून के मौसम में राज्य में अब तक 269.1 मिमी बारिश हुई है, जबकि सामान्य 278.7 मिमी है। यानी कमी सिर्फ़ 3 प्रतिशत की है, जो अक्टूबर के दूसरे हिस्से में बने दो लगातार सिस्टम के कारण लगभग भर गई।
कोलकाता में बारिश और तेज़ हवाएं
टेलीग्राफ इंडिया की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि कोलकाता में बारिश और तेज़ हवाओं का अनुमान है, जबकि चक्रवात अर्णब लैंडफॉल के बाद कमज़ोर पड़ रहा है। इस शहर के लिए अलग-अलग अनुमानों को ध्यान में रखते हुए ताज़ा IMD अपडेट देखते रहना बेहतर होगा।
आगे क्या
मौसम विभाग के मुताबिक़ अर्णब धीरे-धीरे कमज़ोर होकर डीप डिप्रेशन बनने की राह पर है। दक्षिण अंडमान सागर के ऊपर एक नया कम दबाव क्षेत्र बनने की संभावना है, लेकिन उसका केरल के मौसम पर असर अभी साफ़ नहीं है। फिलहाल इतना तय है कि आंध्र तट पर नुकसान का आंकड़ा अभी और बदल सकता है, इसलिए स्थानीय प्रशासन और IMD की ताज़ा चेतावनियों पर नज़र रखें।