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court: पोलैंड में संवैधानिक अदालत के अध्यक्ष एक महीने के लिए निलंबित, प्रदर्शन और तख्तापलट के आरोप

पोलैंड की संवैधानिक अदालत के अध्यक्ष बोगदान शेचकोव्स्की और उप-अध्यक्ष को एक महीने के लिए निलंबित किया गया। अदालत के बाहर प्रदर्शन हुए और पुलिस तैनात करनी पड़ी।

court: पोलैंड में संवैधानिक अदालत के अध्यक्ष एक महीने के लिए निलंबित, प्रदर्शन और तख्तापलट के आरोप
Photo: Adrian Grycuk / Wikimedia Commons, CC BY-SA 3.0 pl · Licence

पोलैंड की संवैधानिक अदालत (Constitutional Tribunal) में एक बड़ा टकराव सामने आया है। 30 अक्टूबर को जज अन्ना कोर्विन-पियोत्रोव्स्का ने अदालत के अध्यक्ष बोगदान शेचकोव्स्की और उप-अध्यक्ष बार्टोमिएज सोचांस्की को एक महीने के लिए कर्तव्यों से निलंबित करने का आदेश दिया। इसके बाद शुक्रवार रात अदालत के बाहर प्रदर्शन हुए और पुलिस को हालात संभालने के लिए बुलाना पड़ा।

निलंबन का आदेश और अदालत की स्थिति

अदालत की वेबसाइट पर जारी बयान के मुताबिक, निलंबन की अवधि तक अन्ना कोर्विन-पियोत्रोव्स्का अदालत का नेतृत्व करेंगी। निलंबन का आधार जजों के अस्थायी निलंबन से जुड़े प्रावधानों को बताया गया है।

वारसॉ पुलिस के मुताबिक, एक जज ने जान के खतरे की आशंका जताई थी, जिसके बाद अधिकारी मौके पर पहुंचे। सरकार ने अदालत परिसर की सुरक्षा के लिए दर्जनों दंगा पुलिस के जवान तैनात किए।

प्रदर्शन और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

शेचकोव्स्की को पूर्ववर्ती PiS (लॉ एंड जस्टिस) सरकार ने नियुक्त किया था। PiS के समर्थक शाम को अदालत के बाहर जमा हुए और निलंबन का विरोध किया। अदालत के आधिकारिक X अकाउंट ने इस कदम को "तख्तापलट" (coup d'etat) बताया। कुछ प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क के खिलाफ नारे भी लगाए।

प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने सोशल मीडिया पोस्ट में इस कदम का समर्थन किया। उन्होंने लिखा कि PiS के शासन में हुई गड़बड़ियों से निपटने की प्रक्रिया कठिन और कभी-कभी दर्दनाक है, लेकिन इसके लिए निर्णायक कदम जरूरी हैं।

राष्ट्रपति कारोल नवरोकी ने सेनेगल का प्रस्तावित दौरा रद्द कर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में राष्ट्रपति को पोलैंड में होना चाहिए। लौटने के बाद वे पुलिस बैरिकेड पार कर अदालत की इमारत में पहुंचे। उनके चीफ ऑफ स्टाफ पावेल स्जेफेरनाकर ने X पर लिखा कि राष्ट्रपति सुप्रीम कोर्ट के पहले अध्यक्ष ज़बिग्न्येव कापिंस्की के साथ इमारत में गए।

विवाद की जड़: जजों की नियुक्ति और शपथ

यह विवाद 2015 से चला आ रहा है। उस समय पिछली सरकार ने कानून बदलकर संसद को पांच जज चुनने का अधिकार दिया था, जिनकी नियुक्ति को बाद में अवैध माना गया। उसके बाद नई संसद ने अलग नियुक्तियां कीं और सरकार व अदालत के बीच यह बहस लगातार जारी रही कि किसकी नियुक्ति वैध है।

2026 में नया मोड़ तब आया जब राष्ट्रपति नवरोकी ने संसद द्वारा चुने गए कई जजों की शपथ स्वीकार करने से इनकार कर दिया। राष्ट्रपति कार्यालय का कहना है कि नियुक्ति प्रक्रिया में समय-सीमा और अलग-अलग मतदान की शर्तों पर सवाल हैं। सरकार का तर्क है कि संसद को जज चुनने का संवैधानिक अधिकार है और राष्ट्रपति उनकी नियुक्ति नहीं रोक सकते।

अप्रैल में चार जजों ने संसद में नोटरी के सामने शपथ ली, लेकिन राष्ट्रपति कार्यालय और शेचकोव्स्की ने इसे मानने से इनकार किया। अदालत ने मई में फैसला दिया कि राष्ट्रपति हर नियुक्ति को स्वीकार करने के लिए बाध्य नहीं हैं, जबकि सरकार ने इस फैसले को चुनौती दी। यूरोपीय मानवाधिकार अदालत ने मई में अंतरिम आदेश दिया कि पोलिश अधिकारी इन जजों को काम करने से न रोकें। वहीं वेनिस कमीशन ने कहा कि राष्ट्रपति की शपथ में भूमिका औपचारिक होनी चाहिए।

आगे क्या होगा

अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि एक महीने के निलंबन के बाद अदालत में नेतृत्व और कामकाज किस दिशा में जाएगा। निलंबन के आदेश और "तख्तापलट" के आरोप पर विवाद जारी है। अब तक इस कदम की कोई आधिकारिक पुष्टि या खंडन सामने नहीं आया है, और आने वाले दिनों में अदालत, सरकार और राष्ट्रपति कार्यालय की प्रतिक्रियाएं इस संकट की दिशा तय करेंगी।

अभी की स्थिति: निलंबन लागू है, अन्ना कोर्विन-पियोत्रोव्स्का अदालत का नेतृत्व कर रही हैं, और राजधानी में राजनीतिक तनाव बना हुआ है।

SADDAM ADIL

Editor-in-chief

Saddam Adil is a journalist and digital media professional focused on delivering clear, factual, and engaging news.

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