Technology Explainer
NASA–ISRO के NISAR ने दिखाया रूसी ज्वालामुखी का लावा कैसे फैला
24 सितंबर को जारी जानकारी में कई महीनों के रडार अवलोकन जोड़कर लावा का फैलाव दिखाया गया। अलग ज्वालामुखीय निगरानी रिपोर्ट भी इस क्षेत्र में जारी गतिविधि की पुष्टि करती है।
मुख्य बातें
- NISAR ने रूस के क्राशेनिनिकोव ज्वालामुखी के बदलते लावा क्षेत्र को दर्ज किया।
- जारी दृश्य क्रम में दिसंबर 2025 से अगस्त 2026 तक के अवलोकन हैं।
- अलग निगरानी रिपोर्ट में सितंबर के दौरान भी वहां लावा गतिविधि का उल्लेख है।
NASA और ISRO के संयुक्त पृथ्वी-अवलोकन मिशन NISAR के रडार डेटा से रूस के कामचटका प्रायद्वीप में लावा के फैलने का क्रम सामने आया है। NASA ने 24 सितंबर को बताया कि क्राशेनिनिकोव ज्वालामुखी के बार-बार किए गए अवलोकनों को जोड़कर सतह में बदलाव दिखाया गया। यह घोषणा दूरस्थ प्राकृतिक खतरों की निगरानी में उपग्रहों की भूमिका का उदाहरण है। NASA / JPL, 24 सितंबर 2026
वीडियो किन तारीखों की कहानी दिखाता है
NASA के अनुसार, वैज्ञानिकों ने 17 फ्रेम जोड़े। Scientific Visualization Studio में दिए गए विवरण के मुताबिक, अनुक्रम 25 दिसंबर 2025 से 17 अगस्त 2026 तक का है। इसमें उत्तरी क्रेटर से निकलते लावा का फैलाव देखा जा सकता है। इसलिए जारी होने की तारीख 24 सितंबर होने का अर्थ यह नहीं कि सभी चित्र उसी दिन लिए गए थे। NASA / JPL, 24 सितंबर 2026 · NASA Scientific Visualization Studio, 24 सितंबर 2026
स्वतंत्र निगरानी से क्या पता चलता है
Smithsonian के Global Volcanism Program में प्रकाशित KVERT विवरण इस ज्वालामुखी की गतिविधि के लिए अलग साक्ष्य देता है। 10–16 सितंबर की रिपोर्ट में उत्तरी शंकु के पूर्वी ढलान पर 10–15 सितंबर के दौरान लावा बहने और उपग्रह चित्रों में तापीय संकेत मिलने की जानकारी है। डेटाबेस में 2025 के विस्फोट की शुरुआत भी दर्ज है। यह निगरानी NASA के नए दृश्य अनुक्रम से अलग स्रोत पर आधारित है। Smithsonian Global Volcanism Program / KVERT, 10–16 सितंबर 2026 रिपोर्ट; देखा 27 सितंबर
उस रिपोर्ट की अवधि सितंबर के मध्य तक है। उसे 27 सितंबर की तत्काल स्थिति या आज की चेतावनी समझना सही नहीं होगा। इसी तरह यह NISAR के हर फ्रेम की स्वतंत्र पुनःजांच नहीं है; यह वहां जारी ज्वालामुखीय गतिविधि का अलग अवलोकन है।
रडार सामान्य कैमरे से कैसे अलग है
NASA के तकनीकी विवरण के अनुसार, NISAR माइक्रोवेव संकेत भेजकर सतह से लौटने वाले संकेत मापता है। इससे दिन के उजाले पर निर्भर हुए बिना और बादलों के बीच भी सतह के बारे में जानकारी मिल सकती है। प्रस्तुत लावा अनुक्रम रडार माप से तैयार दृश्य है, किसी कैमरे का लगातार चलने वाला लाइव प्रसारण नहीं। NASA / JPL, 24 सितंबर 2026
विश्लेषण: भारत के लिए वैज्ञानिक महत्व
भारतीय पाठकों के लिए यह संयुक्त मिशन की वैज्ञानिक उपयोगिता का ठोस उदाहरण है। एक क्षेत्र को बार-बार मापने से बदलाव पहचानने का अवसर मिलता है। फिर भी बदलाव देख पाना और अगले विस्फोट का सटीक समय बता पाना अलग क्षमताएं हैं।
आगे उपयोगी सवाल होंगे कि ऐसे डेटा को स्थानीय निगरानी से कैसे मिलाया जाता है और उससे समय पर निर्णय लेने में कितनी मदद मिलती है। इस रिपोर्ट में किसी नए खतरे या भविष्य के विस्फोट की भविष्यवाणी नहीं की गई है।
शोध कटऑफ: 27 सितंबर 2026, 08:28 IST।
चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ian Scrimger · CC BY 3.0। स्रोत का मूल चित्र; कोई क्रॉप, नया टेक्स्ट या ओवरले नहीं।
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Sources
- NASA / JPL | 24 सितंबर 2026 | https://www.nasa.gov/missions/nisar/us-india-satellite-captures-time-lapse-video-of-volcanic-eruption/
- NASA Scientific Visualization Studio | 24 सितंबर 2026 | https://svs.gsfc.nasa.gov/5675
- Smithsonian Global Volcanism Program / KVERT | 10–16 सितंबर 2026 रिपोर्ट; देखा 27 सितंबर | https://volcano.si.edu/volcano.cfm?vn=300190