मिचेल सैंटनर की गेंदबाज़ी: भारतीय बल्लेबाज़ों के लिए क्यों बनी पहेली
न्यूज़ीलैंड के स्पिनर मिचेल सैंटनर इस सीरीज़ में भारतीय बल्लेबाज़ों के लिए सबसे मुश्किल गेंदबाज़ बने हुए हैं। उनकी वैरिएशन और रिलीज़ पर एक नज़र।
न्यूज़ीलैंड के लेफ्ट-आर्म स्पिनर मिचेल सैंटनर इन दिनों ट्रेंड में हैं। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस सीरीज़ में भारतीय बल्लेबाज़ों के लिए वे सबसे ज़्यादा खतरनाक गेंदबाज़ साबित हो रहे हैं। अब तक तीन मैचों में उनके नाम सात विकेट हैं और उनका इकॉनमी रेट सात रन प्रति ओवर है।
आंखों और पैरों पर नज़र
रिपोर्ट के अनुसार सैंटनर की सबसे बड़ी ताकत उनकी नज़र है। ज़्यादातर स्पिनर बल्लेबाज़ के पैरों पर ध्यान देते हैं, जबकि सैंटनर पूरे बल्लेबाज़ को पढ़ते हैं, यानी पैर, हाथ और सिर की हल्की हरकतें। इससे वे अंदाज़ा लगाते हैं कि बल्लेबाज़ आगे आकर खेलेगा या कोई और चाल चलेगा।
2023 वर्ल्ड कप के दौरान उन्होंने कहा था कि सपाट पिच पर या जब उन्हें लगता है कि बल्लेबाज़ कुछ बड़ा करने वाला है, तब वे और ध्यान से देखते हैं। दौड़ते समय वे अपनी लय बीच में तोड़ते हैं, ताकि बल्लेबाज़ पहले अपनी योजना दिखाने पर मजबूर हो जाए।
वैरिएशन और गेंद की रफ़्तार का खेल
सैंटनर के पास बुनियादी लेफ्ट-आर्म स्पिन की वैरिएशन हैं, जो दूर जाती है और जो अंदर कटती है। इसके अलावा सीधी गेंद में भी उनके पास दो तरह की गेंदें हैं। एक ओवर-स्पिन गेंद, जो नीचे बैठकर उछलती है, और दूसरी साइड-स्पिन गेंद, जो तेज़ी से बाहर की ओर घूमती है।
रिपोर्ट बताती है कि भारत जैसी स्पिन वाली पिचों पर वे साइड-स्पिन पर ज़्यादा भरोसा करते हैं, जबकि साउथ अफ्रीका, इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड (SENA) जैसे देशों में उछाल और ड्रॉप से बल्लेबाज़ों को फंसाते हैं। उनकी गेंद की रफ़्तार औसतन लगभग 85 किलोमीटर प्रति घंटा बताई गई है, कभी 75 तक और कभी 95 के आसपास भी। रिपोर्ट के अनुसार उनकी बाँह की रफ़्तार लगभग एक जैसी रहती है, इसलिए बल्लेबाज़ के लिए गेंद का अंदाज़ा लगाना मुश्किल होता है।
नमन धीर के खिलाफ दूसरे T20 की मिसाल
रिपोर्ट में दूसरे T20 मैच का उदाहरण दिया गया है। सैंटनर ने बाएं हाथ के बल्लेबाज़ तिलक वर्मा को लगभग मध्य-90 किलोमीटर की रफ़्तार से गेंदें डालीं, जबकि नमन धीर के खिलाफ गेंदें मध्य-70 के आसपास थीं। धीर को उन्होंने ऑफ स्टंप के बाहर उड़ती हुई गेंदें दीं और बाद में ऊपर से गुज़रती गेंद पर उन्हें चकमा दिया। धीर ने बड़ा शॉट खेलने की कोशिश की, पर गेंद की लंबाई का अंदाज़ा नहीं लगा पाए और कैच देकर आउट हो गए।
क्या आगे है
सैंटनर की खासियत यह बताई गई है कि वे वैरिएशन से ज़्यादा यह समझने पर ज़ोर देते हैं कि कब, कहाँ और कैसे गेंद डालनी है। उनका युवा स्पिनरों के लिए सुझाव है कि पहले स्पिन और रफ़्तार पर पकड़ बनाओ, फिर सटीकता आएगी। अगले मैचों में भारतीय बल्लेबाज़ उनके खिलाफ क्या रणनीति अपनाते हैं, यह देखना दिलचस्प होगा।