भारतीय फुटबॉल टीम की न्यूज़ीलैंड सीरीज़ के लिए 23 खिलाड़ियों का ऐलान, गुरप्रीत बाहर
कोच खालिद जमील ने न्यूज़ीलैंड के खिलाफ दो दोस्ताना मुकाबलों के लिए 23 खिलाड़ियों की टीम घोषित की। गुरप्रीत सिंह संधू को टीम से बाहर रखा गया है।
भारतीय पुरुष फुटबॉल टीम के मुख्य कोच खालिद जमील ने नवंबर अंतरराष्ट्रीय विंडो में न्यूज़ीलैंड के खिलाफ दो दोस्ताना मुकाबलों के लिए 23 खिलाड़ियों के स्क्वाड का ऐलान किया है। टीम 12 नवंबर को ऑकलैंड के गो मीडिया स्टेडियम में और 15 नवंबर को क्राइस्टचर्च के वन न्यूज़ीलैंड स्टेडियम में ऑल व्हाइट्स से भिड़ेगी। भारतीय समयानुसार पहला मुकाबला सुबह 11:30 बजे और दूसरा सुबह 8:30 बजे शुरू होगा।
इस स्क्वाड में सबसे चर्चित फैसला अनुभवी गोलकीपर गुरप्रीत सिंह संधू को बाहर रखने का है। PTI की रिपोर्ट के अनुसार उनका प्रदर्शन भारत की 0-4 की हार वाले ब्राज़ील मुकाबले में निराशाजनक रहा, जिसके बाद उन्हें टीम से हटाया गया।
SAFF चैंपियनशिप से लौटे तीन खिलाड़ी
स्क्वाड में बिजॉय वर्गीज़, मुहम्मद सुहैल और लिस्टन कोलाको को शामिल किया गया है। ये तीनों खिलाड़ी नौशाद मूसा की SAFF चैंपियनशिप 2026 टीम का हिस्सा थे और अब ढाका में चल रहे टूर्नामेंट को छोड़कर जमील की टीम से जुड़ेंगे। वहीं फारुख चौधरी, नौफल पी.एन. और हिमिंगथनमाविया राल्टे को SAFF टीम से रिलीज़ कर दिया गया है, और वे अपने क्लब मुंबई सिटी FC लौटेंगे।
रॉनी खारबुदोन चोट के कारण ढाका नहीं जाएंगे। अनवर अली के बाएं हैमस्ट्रिंग (ग्रेड 1) में चोट लगी है और रिपोर्ट के मुताबिक वे एक महीने से ज़्यादा बाहर रह सकते हैं। लालेंगमाविया राल्टे (अपुइया) और मोहम्मद सनान भी चोट के कारण बाहर हैं।
कोच जमील ने क्या कहा
खालिद जमील ने कहा कि न्यूज़ीलैंड भी विश्व कप खेल चुका देश है और मजबूत प्रतिद्वंद्वी है। उनके मुताबिक ये दोनों मैच घर से बाहर टीम की अच्छी परीक्षा होंगे। उन्होंने कहा कि टीम अच्छी तैयारी, अनुशासन और टीम के रूप में सुधार पर ध्यान देगी।
स्क्वाड शनिवार, 7 नवंबर को बेंगलुरु में इकट्ठा होगा। रविवार को ट्रेनिंग सेशन होगा और उसी रात टीम ऑकलैंड के लिए रवाना होगी।
U-23 टीम और SAFF चैंपियनशिप पर बहस
इसी बीच AIFF के उस फैसले पर भी चर्चा है, जिसमें SAFF चैंपियनशिप में सीनियर टीम की जगह U-23 विकास टीम भेजी गई है। द डेली स्टार की एक रिपोर्ट के अनुसार पूर्व खिलाड़ी और कोच शफीकुल इस्लाम मानिक का मानना है कि सीनियर खिलाड़ियों की गैरमौजूदगी से टूर्नामेंट का स्तर जरूरी नहीं कि गिरे। भारत ने 2009 और 2018 में भी विकास टीमें भेजी थीं। 2009 में भारत ने ढाका में खिताब जीता था, जबकि 2018 में वह उपविजेता रहा।
रिपोर्ट के अनुसार भारत ने अब तक 14 संस्करणों में से नौ खिताब जीते हैं, जबकि मालदीव ने दो। भारत की रैंकिंग अपने दक्षिण एशियाई प्रतिद्वंद्वियों से काफी ऊपर है, और टीम का बड़ा लक्ष्य FIFA टॉप 100 में जगह बनाना है। इसी वजह से छोटी टीमों के खिलाफ जीत से रैंकिंग अंक सीमित मिलते हैं, जबकि हार या ड्रॉ महंगा पड़ सकता है।
खिलाड़ियों के विकास की रणनीति
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि SAFF चैंपियनशिप (5 से 17 नवंबर) का कार्यक्रम न्यूज़ीलैंड सीरीज़ की FIFA विंडो से टकराता है। इससे इंडियन सुपर लीग के क्लबों को अपने मुख्य खिलाड़ी दो हफ्ते के क्षेत्रीय टूर्नामेंट के लिए छोड़ने में दिक्कत हो सकती थी। U-23 टीम भेजना इस दुविधा का बीच का रास्ता माना जा रहा है।
2018 की टीम का उदाहरण देते हुए रिपोर्ट कहती है कि उस समय अनिरुद्ध थापा, लालियनज़ुअला छांगटे, आशिक कुरुनियन और सुभाषीष बोस जैसे युवा खिलाड़ियों को अनुभव मिला, और उनमें से कई बाद में सीनियर टीम के अहम सदस्य बने। हालांकि रिपोर्ट यह भी कहती है कि जो फैसला भारतीय फुटबॉल के लिए सही लगता है, वह जरूरी नहीं कि SAFF के हित में भी हो।
आगे क्या
भारतीय टीम 7 नवंबर को बेंगलुरु में जुटेगी और 12 नवंबर को ऑकलैंड में न्यूज़ीलैंड से पहला मुकाबला खेलेगी। दूसरा मैच 15 नवंबर को क्राइस्टचर्च में होगा। अभी तक की जानकारी के अनुसार टीम का पूरा फोकस इन्हीं दो मुकाबलों की तैयारी पर है।
(नोट: जिन चोटों और रिलीज़ की जानकारी दी गई है, वे रिपोर्ट के अनुसार हैं। टीम के फैसलों की आधिकारिक पुष्टि AIFF की घोषणा के आधार पर है।)
इस खबर का सार: भारतीय फुटबॉल टीम न्यूज़ीलैंड दौरे के लिए नई रणनीति और नए चेहरों के साथ उतर रही है।