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प्रधानमंत्री की डिग्री से जुड़े RTI मामले में केजरीवाल की अपील गुजरात हाईकोर्ट ने खारिज की

अदालत ने पुराने एकल न्यायाधीश के आदेश को बरकरार रखा। ₹25,000 की पहले लगाई गई लागत भी कायम है; इस फैसले में नई अतिरिक्त लागत नहीं लगाई गई।

अहमदाबाद में गुजरात हाईकोर्ट की पुरानी प्रतिनिधि तस्वीर
गुजरात हाईकोर्ट की पुरानी प्रतिनिधि तस्वीर; 29 सितंबर 2026 की सुनवाई का दृश्य नहीं। फोटो: Kiran 6853 / Wikimedia Commons, सार्वजनिक डोमेन। https://commons.wikimedia.org/wiki/File:Gujarat-High-Court.jpg

रिसर्च कटऑफ: 29 सितंबर 2026, लगभग 19:00 IST।

सार: अदालत ने पुराने एकल न्यायाधीश के आदेश को बरकरार रखा। ₹25,000 की पहले लगाई गई लागत भी कायम है; इस फैसले में नई अतिरिक्त लागत नहीं लगाई गई।

मुख्य बातें: अपील खारिज; 2016 में सूचना आयोग के प्रकटीकरण निर्देश को रद्द करने वाला आदेश कायम; मामला डिग्री की प्रामाणिकता पर न्यायिक निष्कर्ष नहीं है।

गुजरात हाईकोर्ट ने मंगलवार, 29 सितंबर को आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल की उस अपील को खारिज कर दिया जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिग्री संबंधी सूचना के मामले में एकल न्यायाधीश के आदेश को चुनौती दी गई थी। मुख्य न्यायाधीश सुनीता अग्रवाल और न्यायमूर्ति डी. एन. रे की खंडपीठ ने पहले का आदेश बरकरार रखा। टाइम्स ऑफ इंडिया की 29 सितंबर की रिपोर्ट और इंडियन एक्सप्रेस गुजराती की 29 सितंबर की रिपोर्ट में फैसले का विवरण है।

मामला कहां से शुरू हुआ?

केंद्रीय सूचना आयोग ने 2016 में गुजरात विश्वविद्यालय से प्रधानमंत्री की डिग्री संबंधी जानकारी देने को कहा था। गुजरात हाईकोर्ट के एकल न्यायाधीश ने 31 मार्च 2023 को उस निर्देश को निरस्त किया और केजरीवाल पर ₹25,000 की लागत लगाई। केजरीवाल ने इस आदेश और लागत के आधार को चुनौती दी थी। उनके वकील ने दलील दी कि सूचना आयोग की कार्रवाई को सीधे उनके औपचारिक आवेदन की तरह नहीं देखा जाना चाहिए। अदालत ने अपील में उठाई गई दलीलों के आधार पर पहले के फैसले में हस्तक्षेप करने का कारण नहीं पाया। टाइम्स ऑफ इंडिया, 29 सितंबर।

₹25,000 की रकम पहले से लगाई गई लागत है, जिसे खंडपीठ ने कायम रखा। रिपोर्ट में उद्धृत आदेश के मुताबिक अपील खारिज करते समय अतिरिक्त लागत का अलग आदेश नहीं दिया गया। इसे 29 सितंबर को लगी नई ₹25,000 की सजा कहना भ्रामक होगा। टाइम्स ऑफ इंडिया, 29 सितंबर।

क्या मायने हैं, आगे क्या देखें?

यह फैसला सूचना के अधिकार के तहत जानकारी के प्रकटीकरण और उस पर हुई अदालती कार्यवाही से जुड़ा है। इसे प्रधानमंत्री की डिग्री असली या नकली होने पर अदालत का फैसला नहीं समझना चाहिए। आगे यदि कोई पक्ष उच्चतर अदालत जाता है, तो उस अपील और उसके आदेश से अगला कानूनी चरण तय होगा; अभी ऐसी कार्रवाई की पुष्टि इन स्रोतों में नहीं है।

Sources

SADDAM ADIL

Editor-in-chief

Saddam Adil is a journalist and digital media professional focused on delivering clear, factual, and engaging news. As a reporter for Chopal, he covers important national and global developments with a focus on accuracy, public interest, and responsible...

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