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कीर्thy सुरेश की वेब सीरीज 'अक्का' रिव्यू: मातृसत्ता की कहानी, पर कमज़ोर पटकथा

कीर्ति सुरेश और राधिका आप्टे की पांच एपिसोड वाली सीरीज 'अक्का' एक काल्पनिक मातृसत्तात्मक शहर की कहानी है। समीक्षकों की राय बंटी हुई है।

कीर्thy सुरेश की वेब सीरीज 'अक्का' रिव्यू: मातृसत्ता की कहानी, पर कमज़ोर पटकथा
Photo: Verghese TK / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0 (cropped) · Licence

कीर्ति सुरेश की नई वेब सीरीज 'अक्का' इन दिनों चर्चा में है। पांच एपिसोड की इस ड्रामा सीरीज में कीर्ति सुरेश के साथ राधिका आप्टे मुख्य भूमिका में हैं। कहानी दक्षिण भारत के एक काल्पनिक शहर पेरनुरु की है, जिसे सदियों से महिलाएं चलाती आ रही हैं। यह सीरीज नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम हो रही है।

कहानी की पृष्ठभूमि

सीरीज 1980 के दशक के दक्षिण भारत में सेट है। पेरनुरु की सत्ता तीन 'अक्काओं' के हाथ में है, जो उस राजा की वंशज मानी जाती हैं जो कभी गायब हो गया था। 1940 के दशक में सरकारी विलय के बावजूद यह शहर आध्यात्मिक रूप से स्वायत्त बना रहा। इलाके तीन हिस्सों में बंटे हैं: मालेमार, पेरपलाडी और हर्कडा।

कहानी के केंद्र में कीर्ति सुरेश का किरदार भवानी है, जो मालेमार की गैंगस्टर उत्तराधिकारी है। वह परंपरा के मुताबिक शादी नहीं करती और 'अक्का' का पद पाने के लिए किसी बच्चे का होना ज़रूरी है। इसी दुनिया में राधिका आप्टे का किरदार रुद्र आती है, जो पेरनुरु की सत्ता को चुनौती देती है। रुद्र के साथ शंकर अन्ना (अंशुमन पुष्कर) भी है।

समीक्षकों की राय बंटी हुई

द हॉलीवुड रिपोर्टर इंडिया ने सीरीज की कल्पनाशीलता की तारीफ की है। समीक्षक के मुताबिक दुनिया गढ़ने की कोशिश प्रभावशाली है, लेकिन कहानी उस स्तर तक नहीं पहुंचती। उनका कहना है कि संवाद बार-बार दोहराए जाते हैं और कई जगह लिंग-भेद पर भाषण जैसा लगता है। एक्शन दृश्यों को भी उन्होंने साधारण बताया है।

डेसिडर ने सीरीज को 'स्किप इट' की रेटिंग दी है। उनके अनुसार कहानी में किरदारों और उनके हितों की साफ जानकारी कम है, जिससे दर्शक का जुड़ाव मुश्किल हो जाता है। हालांकि उन्होंने राधिका आप्टे के अभिनय की खुलकर सराहना की है और उन्हें रुद्र के रूप में 'ठंडी और बेरहम' बताया है।

टेलीग्राफ इंडिया ने इसे महत्वाकांक्षा और विरासत की खूनी लड़ाई बताया है, जिसमें कीर्ति सुरेश और राधिका आप्टे केंद्र में हैं। तीनों समीक्षाओं में एक बात समान दिखती है कि सीरीज का विचार नया है, पर उसका क्रियान्वयन सबको एक जैसा प्रभावित नहीं कर सका।

दर्शकों के लिए क्या मायने

सीरीज की सबसे बड़ी ताकत उसकी मौलिक दुनिया है, जो किसी मौजूदा किताब, फिल्म या सच्ची घटना पर आधारित नहीं है। वहीं इसकी सबसे बड़ी कमज़ोरी यह मानी जा रही है कि कई सहायक किरदार एक जैसे लगते हैं और दांव पर क्या लगा है, यह शुरुआती एपिसोड में साफ नहीं होता। हिंसा भी कई जगह ज़रूरत से ज़्यादा दिखाई गई है।

आगे क्या

पहले एपिसोड के अंत में रुद्र और भवानी के बीच सीधे टकराव के संकेत मिलते हैं। समीक्षकों का मानना है कि अगर कहानी सत्ता की इस लड़ाई को और गहराई से दिखाए, तो सीरीज में तनाव बढ़ सकता है। फिलहाल दर्शकों की राय इस बात पर टिकी है कि बाकी एपिसोड किरदारों को कितनी स्पष्टता देते हैं।

नोट: सीरीज की समीक्षाएं प्रकाशित हो चुकी हैं; इसके बॉक्स ऑफिस या दर्शक संख्या से जुड़ी कोई आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।

SADDAM ADIL

Editor-in-chief

Saddam Adil is a journalist and digital media professional focused on delivering clear, factual, and engaging news.

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