मोतीलाल ओसवाल की रिपोर्ट: अगले 12 महीनों में सोना ₹1.68 लाख तक जाने का अनुमान
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज की ताजा रिपोर्ट में अगले 6 से 12 महीनों में घरेलू बाजार में सोना 1.60 से 1.68 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंचने का अनुमान है।
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड (MOFSL) की ताजा तिमाही सर्राफा रिपोर्ट में अगले 6 से 12 महीनों में घरेलू बाजार में सोने की कीमत 1.60 लाख से 1.68 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंचने का अनुमान जताया गया है। इसी रिपोर्ट के मुताबिक छोटी अवधि में सोना करीब 1.48 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास रह सकता है। रिपोर्ट के चर्चा में आने के साथ मोतीलाल ओसवाल का नाम सर्च में तेजी से ट्रेंड कर रहा है।
मध्यम अवधि के लिए क्या अनुमान है
रिपोर्ट के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना मध्यम अवधि में 4,500 से 4,700 डॉलर प्रति औंस तक जा सकता है। केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीदारी और निवेशकों की मांग को कीमतों का सहारा माना गया है।
रिपोर्ट ने यह भी कहा है कि आर्थिक और राजनीतिक अनिश्चितता के बीच निवेशक सोने को सुरक्षित विकल्प मानते हैं। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति, महंगाई और डॉलर की चाल भी आगे की कीमतों पर असर डाल सकती है।
2026 में कैसा रहा उतार-चढ़ाव
साल 2025 में सोने में लगातार तेजी रही, लेकिन 2026 में तस्वीर बदल गई। रिपोर्ट के मुताबिक जनवरी 2026 में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना करीब 5,600 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा था। इसके बाद भाव तेजी से गिरकर 4,000 डॉलर प्रति औंस से नीचे चले गए, और फिर कुछ सुधार देखने को मिला।
इस उतार-चढ़ाव के पीछे अमेरिकी ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका, महंगाई, ऊंचे बॉन्ड रिटर्न और दुनिया भर के घटनाक्रमों को अहम वजह बताया गया है। रिपोर्ट का कहना है कि अब सोने की कीमत सिर्फ मांग से नहीं, बल्कि वैश्विक आर्थिक फैसलों से भी तय हो रही है।
लंबी अवधि की तस्वीर भी रिपोर्ट में रखी गई है। 2016 में दिवाली के आसपास घरेलू बाजार में सोना करीब 30,000 रुपये प्रति 10 ग्राम था, जो 2026 में करीब 1.5 लाख रुपये तक पहुंच गया। यानी एक दशक में भाव लगभग पांच गुना हुआ।
दिवाली से पहले सोने का पुराना ट्रेंड
रिपोर्ट के अनुसार ऐतिहासिक आंकड़ों में सोने ने आम तौर पर दिवाली के बाद के 30 दिनों की तुलना में दिवाली से पहले के 30 दिनों में बेहतर रिटर्न दिया है। लेकिन रिपोर्ट साफ कहती है कि हर साल दिवाली से पहले कीमत बढ़ने की गारंटी नहीं है।
त्योहारी मांग, घरेलू प्रीमियम, सोने का आयात और फिजिकल खरीदारी की मात्रा भी कीमतों को प्रभावित करती है। इसलिए सिर्फ पुराने ट्रेंड के आधार पर खरीदारी का फैसला करना सही नहीं माना गया है।
MOFSL के विशेषज्ञ क्या कहते हैं
MOFSL के जिंस शोध प्रमुख नवनीत दमानी के मुताबिक आर्थिक अनिश्चितता के बीच सोना सुरक्षित निवेश के रूप में अपनी अहमियत बनाए हुए है। उन्होंने कहा कि आगे की दिशा कुछ बड़े कारकों से तय होगी, जिनमें अमेरिकी ब्याज दरें, महंगाई, डॉलर की मजबूती और अमेरिकी बॉन्ड से मिलने वाला असली रिटर्न शामिल हैं। केंद्रीय बैंकों की खरीदारी भी अहम मानी गई है।
रिपोर्ट में निवेशकों के लिए सावधानी की सलाह भी दी गई है। इस साल सोने में बड़ी गिरावट भी देखी गई है, इसलिए निवेश से पहले अपनी जरूरत, समय सीमा और जोखिम उठाने की क्षमता समझना जरूरी बताया गया है। एक साथ बड़ी रकम लगाने के बजाय अलग-अलग समय पर निवेश करने पर विचार किया जा सकता है। निवेश से पहले किसी सर्टिफाइड फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह लेने की भी सिफारिश की गई है।
आगे क्या देखें
अगले कुछ महीनों में अमेरिकी ब्याज दरों की दिशा, महंगाई के आंकड़े और डॉलर की चाल सोने की कीमत की मुख्य कसौटी रहेंगे। मोतीलाल ओसवाल की यह रिपोर्ट एक अनुमान है, पक्की गारंटी नहीं। निवेशकों को बाजार के ताजा भाव और अपनी वित्तीय स्थिति के हिसाब से फैसला लेना चाहिए।
(यह लेख केवल जानकारी के लिए है, निवेश सलाह नहीं।)
कुल सार: MOFSL के अनुमान में सोने में मध्यम अवधि की तेजी की उम्मीद है, पर छोटी अवधि में भाव 1.48 लाख के आसपास रहने की बात कही गई है।